Sunday, 29 July 2012

 



आजादी के बाद के साठ सालों में देश में विकास के तमाम आंकड़ों के बावजूद क्यों बदहाल जीवन जीने को मजबूर है एक बड़ी आबादी...क्यों तमाम एजेंसियों के होने के बावजूद नहीं है मूल सुविधाएं..सरकारी अस्पताल, सरकारी स्कूलों और सरकारी सेवाओं से क्यों दूर भागता है देश का सक्षम इंसान..क्या इसीलिए हमने अपनी आजादी..अपनी व्यवस्था की बात की थी...आखिर क्यों दूर रहे हम स्वराज और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से...क्यों आज है दो भारत...क्या एक आजाद मुल्क में लोकतंत्र दो विषम परिस्थितियों के बावजूद जिंदा रह सकता है?....ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश का ये मिशन बिना आप पाठकों के सहयोग के सफल होना मुश्किल है...तो आइए लग जाते हैं आज से इस मिशन पर...